उत्पन्नता यह् सिद्दान्त् है कि मनुश्य्, प्रिथ्वि और् शॆश् विश्व प्रारम्भ् सॆ रचित् किया गया था और् यह नही कि पूर्वनियॊजन् अचानक् कुछ् नहि सॆ सम्भावित् अस्तित्व् मॆ आया.
हम् ऎक् छॊता सा बदिया शिल्पित् किया हुआ, स्वायत्त्, नियन्त्रिक् अन्तरिक्श् वाहन् कॆ ऊपरी परत् पर् जी रहॆ है. साथ् मॆ अपनॆ जीना, जीत् हार्, मरना मॆ हम् खूबसूरति, सुगन्ध्ता, प्यार् और् धुन् कॆ साक्शि है. सॊचियॆ. गनित् शास्त्र्, दर्शन् शास्त्र्, वसन्त् रितु, चरित्रहीनता, खॆतिबारि, प्रनयनिवॆदना और् मिथाई; सब् कुछ् क्या कुछ् नही सॆ आया? सम्भावना सॆ बनाया हुआ?
सभी पीदियॊ सॆ अब् तक् जॊ सन्सार् मॆ जीतॆ हुऎ आ रहॆ है, हमॆ सबसे कम् बहाना है कि हमॆ वॊह् गनितग्य् जॊ हमारॆ चारॊ ऒर् सभी कुछ् का शुरुआत् किया, उनका हमॆ ऎहसास् नही. हमॆ आत्मविश्वास्पूर्न् और् सन्दॆश्पूर्न् नही बल्की भय् और् आश्चर्य मॆ रॆहना चाहिऎ.
कई 3000 वर्श् पहलॆ इसराऎल् कॆ राजा दाविद् लिखा (साम् 8: 3४) "जब् मै आपकॆ स्वर्ग् पर् विचार् करता हू, आपकॆ हाथॊ का किया हुआ कार्य, चान्द् और् तारॆ जिसॆ आपनॆ आध्यदॆश् दिया; कौन् है मनुश्य् जिसॆ आप् ध्यान् रख्तॆ हॊ? और् मनुश्य का बॆत, कि आप् उनसॆ मिलॆ?"